मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव, खासकर ईरान और अमेरिका के बीच चल रहे संघर्ष का असर अब वैश्विक बाजारों पर साफ दिखने लगा है। इसका सीधा प्रभाव दुबई के रियल एस्टेट सेक्टर पर पड़ा है, जहां पिछले कुछ महीनों में प्रॉपर्टी की मांग में गिरावट देखी गई है। निवेशकों के बीच अनिश्चितता और जोखिम बढ़ने के कारण कई बड़े सौदे टल गए हैं।
दुबई बाजार में आई सुस्ती – दुबई, जो लंबे समय से विदेशी निवेशकों के लिए आकर्षण का केंद्र रहा है, अब थोड़ी सुस्ती का सामना कर रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि भू-राजनीतिक तनाव और वैश्विक आर्थिक दबावों के कारण निवेशक फिलहाल सुरक्षित और स्थिर बाजारों की तलाश में हैं।
भारत बना निवेश का नया केंद्र – इसी बीच भारत का रियल एस्टेट बाजार नई चमक के साथ उभर रहा है। खासतौर पर गुरुग्राम और मुंबई निवेशकों के लिए सबसे पसंदीदा गंतव्य बनते जा रहे हैं। इन शहरों में तेजी से हो रहा इंफ्रास्ट्रक्चर विकास, बेहतर कनेक्टिविटी और बढ़ती कॉर्पोरेट गतिविधियां निवेश को आकर्षित कर रही हैं।
गुरुग्राम और मुंबई में बढ़ती मांग –गुरुग्राम में आईटी और कॉर्पोरेट हब के विस्तार के कारण आवासीय और कमर्शियल प्रॉपर्टी की मांग तेजी से बढ़ी है। वहीं मुंबई, जो देश की आर्थिक राजधानी है, वहां लक्जरी और हाई-एंड प्रॉपर्टी में निवेश लगातार बढ़ रहा है।
स्थिर अर्थव्यवस्था से मिला सहारा –रियल एस्टेट एक्सपर्ट्स का कहना है कि भारत का स्थिर आर्थिक माहौल और सरकार की नीतियां विदेशी और घरेलू निवेशकों के लिए भरोसेमंद विकल्प पेश कर रही हैं। यही वजह है कि जहां दुबई का बाजार थोड़ी मंदी से गुजर रहा है, वहीं भारत में प्रॉपर्टी सेक्टर “चांदी” कर रहा है।
भविष्य की संभावनाएं
आने वाले समय में अगर वैश्विक तनाव कम होता है तो दुबई बाजार में सुधार संभव है, लेकिन फिलहाल निवेश का झुकाव साफ तौर पर भारत की ओर बढ़ता दिख रहा है।

